भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का इतिहास : भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का गठन भारत में स्वतंत्रता आंदोलन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम था। इसकी स्थापना 1885 में ए.ओ. ह्यूम द्वारा की गई थी, जिसका उद्देश्य ब्रिटिश शासन के अंतर्गत भारतीयों को एक संगठित मंच देना था। कांग्रेस ने अपने पहले अधिवेशन से लेकर स्वतंत्रता प्राप्ति तक भारत के राजनैतिक, सामाजिक और वैचारिक विकास में अहम भूमिका निभाई। इस लेख में हमने कांग्रेस की स्थापना से लेकर इसके प्रमुख अधिवेशनों, विचारधाराओं, विभाजन, और ऐतिहासिक निर्णयों को क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत किया है, जो विशेष रूप से UPSC, SSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का इतिहास

– सितम्बर, 1884 के थियोसोफिकल सोसायटी के अड्यार सम्मेलन में एक देशव्यापी संगठन की बात की गई थी। इसके तहत इण्डियन नेशनल यूनियन नामक संगठन अस्तित्व में आया।

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– दादाभाई नौरोजी के कहने पर इसका नाम इण्डियन नेशनल कांग्रेस रखा गया।

– ‘कांग्रेस’ शब्द उत्तरी अमेरिका से लिया गया था।

– कांग्रेस की स्थापना – दिसम्बर, 1885 को सेवानिवृत्त अंग्रेज अधिकारी .ह्नयूम ने की थी।

– विलियम वेडरबर्न ने ए.ओ.ह्यूम की जीवनी लिखी। ह्यूम एक पक्षी विशेषज्ञ थे तथा उन्होंने जनता के मित्र नामक पत्रिका का प्रकाशन प्रारम्भ करवाया।

– इसका पहला अधिवेशन पूना में होना था परन्तु वहाँ प्लेग फैल जाने के कारण बॉम्बे में हुआ।

कांग्रेस का प्रथम अधिवेशन

– 28 दिसंबर, 1885 को गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में हुआ था, जिसकी अध्यक्षता व्योमेश चन्द्र बनर्जी ने की थी।

– प्रथम अधिवेशन में 72 सदस्यों ने भाग लिया था।

– निम्नलिखित 9 प्रस्ताव पारित किए गए –

1. भारतीय शासन विधान की जाँच के लिए रॉयल कमीशन का गठन किया जाए।

2. भारत परिषद् को समाप्त किया जाए।

3. प्रान्तीय व केन्द्रीय व्यवस्थापिका का विस्तार व जन-प्रतिनिधियों की संख्या में बढ़़ोतरी की जाए।

4. ICS परीक्षा का आयोजन भारत व इंग्लैंड दोनों जगह किया जाए तथा आयु सीमा 19 वर्ष से 23 वर्ष की जाए।  

5. सैन्य व्यय में कटौती की जाए।

6. इंग्लैंड से आयातित कपड़ों पर पुन: आयात कर लगाया जाए।

7. बर्मा को भारत से अलग किया जाए।

8. समस्त प्रस्तावों को सभी प्रदेशों की सभी राजनीतिक संस्थाओं को भेजा जाए, जिससे वे इनके क्रियान्वयन की माँग कर सके।

9. कांग्रेस का अगला अधिवेशन कलकत्ता में बुलाया जाए।

नोट:-

1. इन प्रस्तावों में से एक भी प्रस्ताव किसानों व मजदूरों से संबंधित नहीं था।

2. कांग्रेस की स्थापना के समय गवर्नर जनरल लॉर्ड डफरिन तथा भारत सचिव लॉर्ड क्रॉस थे।

सेफ्टी वाल्व सिद्धांत

  • लाला लाजपत राय ने अपने समाचार पत्र यंग इण्डिया में कांग्रेस की स्थापना में सुरक्षा कपाट की परिकल्पना दी तथा कांग्रेस को डफरिन के दिमाग की उपज बताया।
  • रजनी पाम दत्त (इण्डिया टुडे) ने तो सुरक्षा वॉल्व के मिथक को वामपंथी विचारधारा के कच्चे माल के रूप में ही स्थापित कर दिया था।
  •  इसी परम्परा के अन्य लेखकों के अनुसार भी उस समय भारतीय जनमानस में एक क्रांति दस्तक दे रही थी, जिसे विफल करने के लिए लॉर्ड डफरिन के इशारों पर अंग्रेज अधिकारी ए.ओ.ह्यूम द्वारा कांग्रेस की स्थापना की गई। 

कांग्रेस के बारे में मत

बंकिम चंद्र चटर्जी – “कांग्रेस के लोग पदों के भूखे हैं।”

सर सैय्यद अहमद खाँ – “कांग्रेस आंदोलन न तो लोगों द्वारा प्रेरित था और न ही उनके द्वारा सोचा या योजनाबद्ध किया गया था।”

अश्विनी कुमार दत्त – “कांग्रेस सम्मेलन तीन दिन का तमाशा है।”

डफरिन – “वह जनता के उस अल्पसंख्यक वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है, जिसकी संख्या सूक्ष्म है।”

कर्ज़न – “कांग्रेस अपनी मौत की घड़ियाँ गिन रही है, भारत में रहते हुए मेरी एक सबसे बड़ी इच्छा है कि मैं उसे शांतिपूर्वक मरने में मदद कर सकूँ।”

बाल गंगाधर तिलक – “यदि वर्ष में हम एक बार मेंढक की तरह टर्राए तो हमें कुछ नहीं मिलेगा।”

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के महत्त्वपूर्ण वार्षिक अधिवेशन

वर्षस्थलअध्यक्षप्रमुख घटनाएँ
1886कलकत्तादादाभाई नौरोजी· नेशनल एसोसिएशन कॉन्फ्रेंस का राष्ट्रीय कांग्रेस में विलय हो गया।· वायसराय लॉर्ड डफरिन ने सभी सदस्यों को ‘गार्डन पार्टी’ पर आमंत्रित किया।
1887मद्रासबदरुद्दीन तैय्यबजी· भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष।· इस सम्मेलन में कार्य संचालन भारत प्रतिनिधियों की एक समिति को सौंपा गया।
1888इलाहाबादजॉर्ज यूले(प्रथम अंग्रेज अध्यक्ष)· जॉर्ज यूले प्रथम यूरोपीय निर्वाचित अध्यक्ष बने।· इलाहाबाद के गवर्नर ऑकलैंड कालविन के विरोध के बावजूद सम्मेलन संपन्न हुआ।· इस अधिवेशन में पहली बार लाला लाजपत राय ने हिंदी में भाषण दिया।
1889बंबईविलियम वेडरबर्न· इंग्लैंड में कांग्रेस के दृष्टिकोण का प्रचार करने के लिए एक प्रतिनिधि मंडल भेजने का फैसला किया गया।
1890कलकत्ताफिरोज़शाह मेहता· कलकत्ता विश्वविद्यालय की पहली महिला स्नातक कादंबिनी गांगुली ने कांग्रेस अधिवेशन को संबोधित किया।
1896कलकत्तारहमतुल्ला एम. सयानी· पहली बार वन्देमातरम् गाया गया।
1905बनारसगोपाल कृष्ण गोखले· बंग-भंग की आलोचना।
1906कलकत्तादादाभाई नौरोजी· दादाभाई नौरोजी ने स्वराज (स्वशासन) शब्द का कांग्रेस के मंच से प्रथम बार प्रयोग किया।
1907सूरतरासबिहारी घोष· कांग्रेस का प्रथम विभाजन (नरम दल एवं गरम दल के बीच)
1911कलकत्ताप. विशन नारायणधर· पहली बार ‘जन गण मन गाया गया।
1915बंबईसत्येंद्र प्रसाद सिन्हा· लॉर्ड विलिंगटन ने भाग लिया (इस समय यह बंबई का गवर्नर था)
1916लखनऊअम्बिका चरण मजूमदार· नरम दल एवं गरम दल का समझौता।· कांग्रेस और मुस्लिम लीग में समझौता (सांप्रदायिक निर्वाचन प्रणाली को स्वीकार कर लिया गया)।· तिलक ने – स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार हैमैं इसे लेकर रहूँगा नारा दिया।
1917कलकत्ताएनी बेसेंट· प्रथम महिला अध्यक्ष
1920नागपुरसी. विजयाराघवा चार्य· कांग्रेस ने पहली बार देशी रियासतों के प्रति नीति घोषित की।
1924बेलगाँवमहात्मा गांधी· एकमात्र कांग्रेस अधिवेशन जिसकी अध्यक्षता महात्मा गाँधी ने की।
1925कानपुरसरोजिनी नायडू· प्रथम भारतीय महिला अध्यक्ष
1927मद्रासएम.ए. अंसारी· पूर्ण स्वाधीनता की माँग की गई।· साइमन कमीशन के बहिष्कार का प्रस्ताव पारित
1929लाहौरजवाहरलाल नेहरू· पूर्ण स्वराज की माँग
1931कराचीवल्लभभाई पटेल· मूल अधिकारो का प्रस्ताव· गांधी-इरविन समझौते का अनुमोदन
1936लखनऊजवाहरलाल नेहरू· जवाहरलाल नेहरू ने समाजवाद को भारत की समस्याओं को हल करने की कुंजी बताया।
1936-37फैज़पुरजवाहरलाल नेहरू· प्रथम अधिवेशन जो गाँव में हुआ।
1938हरिपुरासुभाष चंद्र बोस· राष्ट्रीय नियोजन समिति का गठन किया गया, जिसके अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू बने।· सुभाष चंद्र बोस द्वारा हिंदी भाषा के लिए रोमन लिपि लागू करने की वकालत की गई।
1939त्रिपुरीसुभाष चंद्र बोस· कार्यकारिणी के गठन के प्रश्न पर गांधीजी से विवाद हो जाने के कारण सुभाष चंद्र बोस ने अध्यक्ष पद से त्याग पत्र दे दिया। तत्पश्चात् डॉराजेन्द्र प्रसाद को अध्यक्ष बनाया गया।
1940रामगढ़मौलाना अबुल कलाम आज़ाद· लगातार 6 वर्ष तक कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर रहे। (1940-45)
1946मेरठआचार्य जे.बी. कृपलानी· आज़ादी के समय अध्यक्ष थे।
1948जयपुर (राज.)डॉ. पट्टाभि् सीतारमैया· स्वतंत्रता के बाद प्रथम अधिवेशन हुआ।

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