आज की इस पोस्ट में हम प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत से संबंधित नोट्स उपलब्ध करवा रहे हैं इसमें आपको साहित्यिक स्रोत , महाकाव्य , अथॆव्ड एवं ऋग्वेद इन सभी के बारे में जानकारी मिलेगी अगर यह टॉपिक आपकी परीक्षा के सिलेबस में है तो आप निचे दिए गए नोट्स के माध्यम से शानदार तैयारी कर सकते हैं
Table of contents
प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत
साहित्यिक स्रोत
1. धार्मिक स्रोत
A. वैदिक साहित्य
● श्रुति ● वेद
● ब्राह्मण ● आरण्यक-उपनिषद
B. वैदिकेत्तर साहित्य
● स्मृति ● वेदांग
● पुराण ● धर्मशास्त्र
C. बौद्ध साहित्य
D. जैन साहित्य
वैदिक साहित्य
★ वैदिक काल में सम्पूर्ण जानकारी वैदिक साहित्य से प्राप्त होती है।
वेद :-
★ वेदों के रचनाकार : अपौरुषेय (अर्थात् वेदों की रचना किसी पुरुष विशेष के द्वारा नहीं की गई)
★ इसका संकलन – महर्षि कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास ने किया।
वेद चार प्रकार के होते हैं-
1. ऋग्वेद
2. यजुर्वेद
3. सामवेद
4. अथर्ववेद
★ ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद को वेदत्रयी भी कहा जाता है।
★ यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद ये उत्तरवैदिक काल की रचनाएँ हैं।
ऋग्वेद :
★ यह आर्यों का सबसे प्राचीन ग्रन्थ है।
★ ऋग्वेद देवताओं की स्तुति से संबंधित रचनाओं का संग्रह है।
★ इसकी भाषा पद्यात्मक है।
★ ‘गायत्री मंत्र’ सविता (सवितृ) देवता को समर्पित है। इसका उल्लेख ऋग्वेद के तीसरे मंडल में है। इसके रचनाकार विश्वामित्र हैं।
यजुर्वेद
★ यजु का अर्थ होता है यज्ञ।
★ यजुर्वेद में यज्ञ विधियों का वर्णन किया गया है।
★ यजुर्वेद की भाषा पद्यात्मक तथा गद्यात्मक दोनों हैं।
★ यजुर्वेद के कर्मकांडों को सम्पन्न कराने वाला पुरोहित “अध्वर्यु” कहलाता है।
★ यजुर्वेद के दो भाग हैं:-
1. शुक्ल यजुर्वेद –
2. कृष्ण यजुर्वेद –
सामवेद :
★ सामवेद की रचना ऋग्वेद में दिए गए मंत्रों को गाने योग्य बनाने के उद्देश्य से की गई थी।
★ “साम ” का अर्थ है- “गायन”
★ सामवेद के मंत्रों का उच्चारण करने वाला “उद्गाता” कहलाता है
★ सूर्य की स्तुति इसी वेद में है।
अथर्ववेद
★ अथर्ववेद की रचना अथर्वा ऋषि ने की थी।
★ इसमें रोग तथा उसके निवारण के साधन के रूप में जादू, टोनों आदि की जानकारी दी गई है।
★ इसे अनार्यों की कृति मानी जाती है।
★ आरण्यक ग्रंथों की रचना जंगलों में ऋषियों द्वारा की गई थी।
2. सूत्र साहित्य
● इसके तीन भाग है–
1. वेदांग – संख्या-6 (शिक्षा, निरूक्त, कल्प, छंद, व्याकरण, ज्योतिष)
2. सूत्र कल्प – A. गृहसूत्र B. धर्मसूत्र C. श्रोत सूत्र
3. धर्मशास्त्र – धर्मसूत्र, स्मृतियाँ, टीकाए, निबंध
3. धर्मसूत्र
● कल्प/वेदांग का भाग हैं
● गद्य शैली में रचित
● विषय – संस्कार, परम्पराएँ, सामाजिक जीवन, रीति-रिवाज
4. स्मृतियाँ
● पद्य शैली में (विष्णुस्मृति-गद्य में)
● धर्मसूत्रों का स्थान लिया इस कारण धर्मशास्त्र का भाग माना जाता है।
प्रमुख स्मृतियाँ
A. मनुस्मृति (शुंग काल)
टीकाकार–
1. मेघातिथि
2. गोविन्दराज
3. कुल्लक भट्ट
4. राघ्वानन्द
B. याज्ञवलक्य स्मृति (मौर्योन्तर/गुप्त काल)
टीकाकार–
1. विज्ञानेश्वर
2. विश्वरूप
3. अपार्पक
C. नारद स्मृति
D. वृहस्पति
E. कात्यायन
D. दुवल स्मृति
5. निबंध
● देवण्ण भट्ट – स्मृति चंद्रिका
● महाध्वाचार्य – पाराशर माध्वीय
● रघुनन्दन – स्मृति तत्व
महाकाव्य
रामायण
● मूलत: 6000 श्लोक थे, गुप्तकाल में बढ़ाकर 24000 कर दिए। इस कारण ‘चतुर्विशतिसहस्रीसंहिता’ कहा जाता है।
● अंतिम रूप से संकलन ‘गुप्तकाल’ में हुआ।
● संकलन – आदिकवि वाल्मिकी द्वारा
● संस्कृत भाषा का महाकाव्य
● सातकाण्ड–
1. बालकाण्ड 2. अयोध्याकाण्ड
3. अरण्यकाण्ड4. किष्किन्धा काण्ड
5. सुन्दरकाण्ड 6. लंकाकाण्ड
7. उत्तरकाण्ड
महाभारत
● लेखक – वेदव्यास (महर्षि कृष्ण द्वैपायन)।
● इसमें कुल 18 पर्व है।
● शांति पर्व – सबसे बड़ा पर्व हैं।
● भीष्म पर्व – भगवतगीता इसी का भाग
● परिशिष्टि – हरिवंश / खिलपर्व
● उक्त पर्वों में–
● कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए उपदेश मिलते हैं।
● कौरवों व पाण्डवों के युद्ध का विवरण
● रामाख्यान (राम कहानी मिलती हैं।)
पुराण
● शाब्दिक अर्थ – प्राचीन आख्यान हैं।
● उग्रसर्वा व लोमहर्ष द्वारा पुराणों का संकलन किया गया
(अंतिम संकलन – गुप्त काल में)
● अथर्ववेद में उल्लेख मिलता हैं।
● भविष्य शैली में लिखे गये हैं।
● 18 महापुराण व 18 उपपुराण हैं।
● अमरकोश में पुराणों के 5 विषय दिए हैं।
● सर्ग – सृष्टि
● प्रतिसर्ग – पुन सृष्टि
● मनवन्तर – विभिन्न मनुओं का युग
● वंश – देवताओं व ऋषियों की वंशावलियों
● वंशानुचरित
राजवंशो की वंशावलियाँ
1. मत्स्य (शुग/सातवाहन)
2. वायु
3. विष्णु
4. भागवत
5. ब्रह्माण्ड पुराण
विविध तथ्य
● प्राचीन व प्रामाणिक पुराण – मत्स्य पुराण
● लघु पुराण – ब्रह्ममाण्ड पुराण
● सर्वोत्तम सुरक्षित – विष्णु पुराण
● सर्वाधिक लोकप्रिय – अग्नि/विष्णु पुराण
● सबसे वृहद – स्कन्द पुराण
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